अब चुप रहे तो...
आज की रुक रही है साँसे,
क्या सिर्फ मूक बने देखते जाओगे।
जो नहीं किया सामना इस पल का,
आने वाले पल को क्या समाझाओगे ।
एक चिंगारी कब तक जले अँधेरे में,
कब तुम अपना खून जलोअगे ।
अब चुप रहे तो... जीवन भर फिर पछताओगे
जो देखे सपने सुन्दर कल के,
सोते रहने से नहीं होंगे पूरे ।
चलो जागो अब नया दम भरो,
फिर शुरू करे वो काम अधूरे ।
उठो देखो नए सूरज का मंजर,
क्या अब भी सोते रह जाओगे ।
अब चुप रहे तो... अंधेरो का ही साथ पाओगे॥
जो लड़े दुनिया से तुम्हारे लिए,
तुम उस मसीहा के इंतज़ार में जिए ।
यु ही नहीं मिलती आसमानी मदद,
बिना कोई बलिदान दिए ।
जगा लो ऐसा विश्वास दिल में ,
अपनों में से ही नया मसीहा बनोगे।
अब चुप रहे तो... सब खो कर भी कुछ न फिर पाओगे
आने वाली नस्ल तुमसे जवाब मांगेगी,
क्यूँ न रोकी ये आंधी हिसाब मांगेगी।
दीवार बन जाओ मजबूत इरादों की ,
तूफानी हवा भी दामन में पनाह मांगेगी।
जब क़यामत की लहर उठेगी हर तरफ,
न फिर बंद दरवाजो में छुप पाओगे।
अब चुप रहे तो॥ कैसे खुद से नजरे मिलोगे
Dedicated to the spirit of Anna Hazare
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Thursday, April 7, 2011
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