Thursday, April 7, 2011
Ab chup rahe to...
आज की रुक रही है साँसे,
क्या सिर्फ मूक बने देखते जाओगे।
जो नहीं किया सामना इस पल का,
आने वाले पल को क्या समाझाओगे ।
एक चिंगारी कब तक जले अँधेरे में,
कब तुम अपना खून जलोअगे ।
अब चुप रहे तो... जीवन भर फिर पछताओगे
जो देखे सपने सुन्दर कल के,
सोते रहने से नहीं होंगे पूरे ।
चलो जागो अब नया दम भरो,
फिर शुरू करे वो काम अधूरे ।
उठो देखो नए सूरज का मंजर,
क्या अब भी सोते रह जाओगे ।
अब चुप रहे तो... अंधेरो का ही साथ पाओगे॥
जो लड़े दुनिया से तुम्हारे लिए,
तुम उस मसीहा के इंतज़ार में जिए ।
यु ही नहीं मिलती आसमानी मदद,
बिना कोई बलिदान दिए ।
जगा लो ऐसा विश्वास दिल में ,
अपनों में से ही नया मसीहा बनोगे।
अब चुप रहे तो... सब खो कर भी कुछ न फिर पाओगे
आने वाली नस्ल तुमसे जवाब मांगेगी,
क्यूँ न रोकी ये आंधी हिसाब मांगेगी।
दीवार बन जाओ मजबूत इरादों की ,
तूफानी हवा भी दामन में पनाह मांगेगी।
जब क़यामत की लहर उठेगी हर तरफ,
न फिर बंद दरवाजो में छुप पाओगे।
अब चुप रहे तो॥ कैसे खुद से नजरे मिलोगे
Dedicated to the spirit of Anna Hazare
Monday, April 12, 2010
srujan
कर मन कुछ नया सृजन
पुराने सारे खंडहर तोड़ दे
जो न बदले वो वक़्त छोड़ दे
नए सुर , नए ताल , बना कोई नयी धुन
कर मन कुछ नया सृजन
चल खोज सम्भावना परिवर्तन की
सपनो की ईमारत को मिले नीव चिंतन की
कल्पना के घोड़े रचना के गगन पे उड़े
आज इन्द्रधनुष में भी कोई नया रंग भरे
अब न हो कोई सीमा कोई बंधन
कर मनं कुछ नया सृजन
नीले फलक पे भी तेरी अपनी छाप रहे
कृति ऐसी जो तेरे भी बाद रहे
चेतना जब रच दे एक नया जीवन
बन सकता है तू मानव से भगवन
नयी बसंत, नव तरु प्रफुल्लित नव सुमन
कर मनं कुछ नया सृजन
Wednesday, February 24, 2010
Meri Saanse
किये न जाने कितने टुकड़े
न जाने कितने हिस्से
तेज धार से काट दी मेरी साँसे
मजहब ने कहा खुदा की नेमत है
तू है जिन्दा ये उसकी रहमत है
कर दो जहां के मालिक का शुकर
रखता है वो तेरी हर सांस की खबर
है जमीन और आसमान की ये साँसे
जिंदगी ने यु बाँट दी मेरी साँसे
मुल्क जिसने बनाई तेरी पहचान
चुकाना है उसका भी अहसान
गवा दे कुछ साँसे वतन परस्ती में
होगा तेरा नाम शहीदों की बस्ती में
सरहदों ने फिर काट दी ये साँसे
जिंदगी ने यु बाँट दी मेरी साँसे
समाज और इन्सानियत भी मांगते हिसाब
तुझे सलामत रखे है हमारा लिहाफ
कौम का है जो कर्ज तुझ पर
उसे हर सांस की कीमत पे अदा कर
अब तो लगती है उधार की साँसे
जिंदगी ने यु बाँट दी मेरी साँसे
Wednesday, January 27, 2010
chand ki khwaish
मेरे लिए वो खुद रात भर जलता रहा
है ये छोटा सा घर मेरा न कोई महल
इसमें आसमानी टुकडो की नुमाइश क्यों करता
मै चाँद की ख्वाइश भला क्यूँ करता
एक जुगनू बैठ खिड़की पर मुस्कुराती रही
छोड़ अपना घर मेरे लिए जगमगाती रही
चाँद तो रोशन है किसी और के दम पर
मै उधार की रौशनी की गुजारिश क्या करता
मै चाँद की ख्वाइश भला क्यूँ करता
जिंदगी में उजाला भरती रही तेरी नजर
इन आँखों की चमक रहे साथ उम्र भर
जो है भटका पूनम और अमावस के बीच
उसे राहगुजर बनाने की सिफारिश क्यों करता
मै चाँद की ख्वाइश भला क्यूँ करता
Wednesday, January 20, 2010
Phir se koi bachpanaa karo yaar
मुस्कुराये हर चेहरे के साथ , अपना या अनजान
थाम लिया हर हाथ बढ़ के किलकारी की साथ
आज फिर क्यूँ तुमने बांध लिए है दोनों हाथ
जिंदगी का खुली बांहों से सामना करो यार
आज फिर से कोई बचपना करो यार
एक पल रूठे तो दूजे ही पल मान जाते
चलते कभी, कभी मासूमियत से लडखडाते
आगे बढ़ फिर मुड़े वापस बेजान खिलौनों के लिए
आज नहीं रुकते ये कदम जिन्दा इंसानो के लिए
पाकर अपनी मंजिल एक बार पीचे मुड़ो यार
आज फिर से कोई बचपना करो यार
सोच ते चाँद है दूध से भरा कटोरा
पकड़ ही लेंगे जो उछल जाए हम थोडा
जब हम सोते है तो कोई परी आती है
तितलियाँ उड़ के इन्द्रधनुष बनाती है
खुली आँखों से तिलस्मी सपने बुनो यार
आज फिर से कोई बचपना करो यार
छोड़ा रोना जब सुनी कोई नयी आवाज
समझा खुद को हर साज का उस्ताद
क्या है भला बुरा ये परवाह क्यों करते
नहीं मिला खाना तो मिटटी से पेट भरते
जरा एक बार अपने दिल की सुनो यार
आज फिर से कोई बचपना करो यार
न थी कोई फिकर जिंदगी खुशनुमा थी
क्यूँ आज सवाल इतने खड़े हो गए
अब सब कुछ लगता है बदला हुया
लगता है हम कुछ ज्यादा बड़े हो गए
भूल के उम्र , काम जरा इतना करो यार
आज फिर से कोई बचपना करो यार
Monday, November 16, 2009
Banjaro Ka Kaha Thikana
रात का बसेरा सुबह उजड़ जाना होता है
बंजारों का कहा कोई ठिकाना होता है
बिना मंजिल की राहो में चलते जाते है
हर मोड़ पे कितना कुछ छोड जाना होता है
बंजारों का कहा कोई ठिकाना होता है
आसमान की छत के नीचे है जमीं का बिछोना
न कुछ पाने की चाहत , न है कुछ खोना
इंसान के हाथ में नही पाना खोना होता है
बंजारों का कहा कोई ठिकाना होता है
हवा के एक झोके जैसे चलते जाना
कभी कहानी परदेस की, कभी देश के गीत गाना
इन गीतों और कहानियो से इतिहास बनाना होता है
बंजारों का कहा कोई ठिकाना होता है
चल सको तो चलो तुम भी उसी चाल से
हो बादल गगन का या एक पत्ता टूटा डाल से
जिंदगी कब रूकती है , उसे चलते जाना होता है
बंजारों का कहा कोई ठिकाना होता है
Monday, November 9, 2009
Khel Dil Ka
जीत के भी हार जाता है कोई,
हार के भी मुस्कुराता है कोई
भले ही मिले हो सिर्फ गिले शिकवे
सब लुट जाने का जश्न मनाता है कोई
चैन न हो नसीब इसमें २ पल का
ये कैसा है अजब खेल दिल का
जागती आँखे भी सपना बुन लेती है
सपनो से कोई अपना चुन लेती है
जिंदगी की बदल जाती है हकीक़ते
आवाज तेरे दिल की मेरी धड़कने सुन लेती है
आज का ये लम्हा न सोचे कल का
ये कैसा है अजब खेल दिल का
खुशी इतनी इसमें की पागल कर दे
और पागलपन की हद तक ये गम दे
कैसे समझाए उस अहसास को हम
जिसमे किसी की हंसी भी आँखे नम कर दे
ले लिया हमने तो दर्द जमाने भर का
ये कैसा है अजब खेल दिल का
सिर्फ एक झलक पाने को तरसे नजर
नजारा कोई भी हो तुझे ही ढूंढे नजर
थम जाए ये जहा तुझे देखने के बाद
ना जाने इस चेहरे में है ये कैसा असर
बंद आँखों से भी न होता है तू ओझल सा
ये कैसा है अजब खेल दिल का
Monday, October 26, 2009
Welcome Winter
The orange rays of sun with only a slight warmth reminds me hesitant smile of some ones face
Nature plays with all colours of rainbows , bringing them together on a lively and wet canvass twittering birds, golden clouds, glittering water and teh splendor of winter fills my heart
Monday, October 19, 2009
Tera Karam
हर इंसान में तेरा अक्स नजर आये
जरुरत न रहे काशी और काबे की
हर राह दुनिया की हज बन जाए
फिर न कभी दिल तेरे दरस को तरसे
अबकी ऐसा तेरा करम बरसे
सुबह और शाम आते जाते रहे
हर वक़्त तेरे सजदे में झुके नजर
चारों और दिखे तेरा ही नजारा
तेरे दर पे रुके मेरी हर एक डगर
तेरा ख्याल हो न जुदा इस दिल से
अबकी ऐसा तेरा करम बरसे
न हो इंतज़ार आरती और अजान का
सब नामो में तेरा नाम सुनने की आदत हो
समां जाए दिलो दिमाग में तू इस कदर
हर ख़याल मेरे जहन का तेरी इबादत हो
मेरी बंदगी के चर्चे हो तेरे दर पे
अबकी ऐसा तेरा करम बरसे
हो फिजाओं में भाईचारा और मोहब्बत
फिर न उठे आँसुओ का समंदर
नाफ्रातो की आंधियो का न वजूद हो
न हो जंग फिर किसी का मुक्कादर
जहा में हो दीन e अमन फिर से
अबकी ऐसा तेरा करम बरसे
Saturday, September 19, 2009
untitled
सिरहाने बैठ कर माथा सहलाती हो
कहती जाग सूरज सर चढ़ आया है
आज तेरी पसंद का नाश्ता बनाया है
हर दिन किसी बहाने यु नीद से जगाती हो
जाने कैसे हमेशा मुझ से पहले उठ जाती हो
इस पल घर का हर्र एक कोना संवर लिया
उस पल चली मंदिर जलाने पूजा का दिया
कभी चढ़ छज्जे पे पडोसन को पुकारा
कभी चौखट पे खड़ी गाय को दुलारा
इधर ख़तम तो उधर कुछ शुरू कर देती हो
इतना सब एक साथ कैसे संभल लेती हो
ले आयी जो भी था फ़कीर की पुकार पे
आँगन गूंज जाता पायल की झंकार से
ठहर जाती हो दो पल सब काम छोड़ कर
और देखती हो मुझे जाते हुए उस मोड़ तक
चंद लोगो से ही अपना पूरा संसार बुन लेती हो
क्यूँ इन सब के बीच खुद को भुला देती हो
Thursday, August 20, 2009
Tadap
Seeing some one dear to us in pain is the biggest pain
उसका हर आंसू तीर सा चुभता है
उसके दर्द से अपना दिल दुखता है
एक हलकी सी आह भी निकले जो
कई चीखों का शोर सुनायी पड़ता है
सब दुआओं को एक आवाज में सिमटे देखा है
कभी किसी अपने को तड़पते देखा है
अपनी तकलीफे सब छोटी हो जाती है
हम जागते है और राते सो जाती है
हो यदि उसके चहरे पे गम का साया
सारी मुस्कुराह्ते लवो से खो जाती है
खुशियों के बादलो को स्याह होते देखा है
कभी किसी अपने को तड़पते देखा है
जब सूरज भी रौशनी नही फैला पता
चारो पहर हो फैला अजीब सन्नाटा
उजाले और अंधेरे में फर्क नही होता
उसका हाथ थामे चुपचाप बैठे होते है
कितना कुछ कहने को फिर भी चुप रहते है
खामोशियों में बया दर्द समेट है
कभी किसी अपने को तड़पते देखा है
Tuesday, July 28, 2009
Salaah ( Looking for better title)
पड़ोसी हैरान परेशां होकर हमारे पास आए
बोले बीवी से छुटकारा पाने का कोई उपाय बताये
हमने यु ही कहा , महाभारत से कुछ सीख लीजिये
जो पुराने लोगो ने किया है, वही कीजिये
धर्मराज की तरह बीवी को कही जुए में हार जाइये
इंडिया में legal issues है लॉस वेगास के casino में किस्मत आजमाइए
पड़ोसी बोले किस मुर्ख ने आपको बनाया consultant
Solution देने से पहले समझिये तो प्रॉब्लम स्टेटमेंट
लोस वेगास तो क्या यदि missage को लोनावाला भी ले जा पाते
तो आपसे ये फिजूल सलाह माँगने फिर क्यों आते
उसने मैरिज़ aniversary बाहार सलेब्राते करने की ठान ली है
और वहा productivity improvement के नाम पे ऑफिस ने जान ली है
एक तरफ़ बॉस की डांट और दूजी और बीवी की फटकार
नही सहा जाता ये दोहरा इमोशनल अत्याचार
ना ऑफिस में और ना घर में लगता है हमारा मन
बस तलाशते रहते है नए नए excuse twenty four by seven
Aap तो भली बहती जानते है ये recession का ज़माना है
दूसरी बीवी मिल जायेगी पर मुश्किल एक नौकरी का मिल पाना है
अरे हमारे पास बॉस है ये तो luck है हमारा
वरना bench वालों को तो recession ने सबसे पहले मारा
इसलिए परिस्थिति बस हम यही decision लेंगे
बॉस का साथ निभाने को , बीवी को छोड़ देंगे
अब हमें अपना विराट consultant स्वरुप दिखाए
फटाफट बीवी से छुटकारा हेतु सस्ता सरल उपाय बताये
आपने अपनी चिता का समान ख़ुद तैयार किया है
पाँव पे कुल्हाडी नही, कुल्हाडी पे पाँव मार दिया है
शादी के पहले चाँद के पार घुमाने का ख्वाब दिखाया
विवाहों उपरांत लोनावाला जाने का भी प्लान न बन पाया
आपके इस नीरस जीवन को शत शत धिक्कार है
यदि आप नही घुमा सकते तो पड़ोसी वर्मा जी तैयार है
ये सुन उन्होंने किसी तरह अपने आप को explode होने से रोका
दहाड़े क्या बकवास है , हमें तो नही मिला ऐसा कोई मौका
हमने कहा गुस्सा थूकिये , आपको दूसरा उपाय बताते है
जिस पर चले मर्यादा पुरषोत्तम राम, वही राह दिखाते है
राम ने भेजा था सीता को वनवास में
अब जंगल न भेज सके तो भेज दे भाभी को पित्र निवास में
इस तरह एक तीर से दो शिकार हो जायेंगे
नौकरी भी रहे और बीवी से डंडे भी नही खायेंगे
वो बोले आपने सीखे है इतिहास से सिर्फ़ ग़लत उदहारण
No wonder कुंवारे हो , नही किया अभी तक किसी ने वरन
पहली बात तो औरो की गलतियां नही दोहरानी चाहिए
और दूसरी सीता को वनवास भेजने वाला भी ख़ुद राम होना चाहिए
आप से अब ना मांगेगे कभी सलाह दुबारा
क्षमा करे नही चाहिए हमे अपनी बीवी से छुटकारा
Sunday, May 24, 2009
Apna Ghar Sambhal Tu
दूसरो के घर में दखल देने वाले
लाखो घुसपैठियों को अक़ल देने वाले
अपने दिमाग से ये फितूर निकाल तू
दूसरो से पहले अपना घर संभाल तू
तुने दूसरे के घर पे पत्थर बरसाए है
बुर्को में छुपा के आतंकी भिजवाये है
हमने भी ऐसे गीदडो को मौत के घाट उतरा है
भय मुक्त देश बनेगा , अब संकल्प हमारा है
तेरे नापाक इरादों का होगा अंत ये जान तू
दूसरो से पहले अपना घर संभाल तू
पाले जो संपोले आज वो भुजंग विषधर है
उस विष की अग्नि में जलता तेरा ही घर है
समझा जिसे गुलाम आज आका बन जाने को है
आतंक का ये अजगर तेरा वतन निगल जाने को है
सीख अपनी ही गलती से, मत और सांप पाल तू
दूसरो से पहले अपना घर संभाल तू
तेरे नापाक मंसूबो ने कितना खून बहाया है
खाए वार पीठ पे हमने,न हथियाएर उठाया है
जिस दिन उठे ये हाथ फिर तू कहा बच पायेगा
तेरा नामो निशान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा
अपना न सही तो कर कुछ अपनों का ख़याल तू
दूसरो से पहले अपना घर संभाल तू
Thursday, February 12, 2009
Baat Doosron ki : The other self
Lets come out from self , may be just for few moments and think about some one else, one may not be able to change some ones life but one can certainly make some ones day :)
दिए तो देंगे सिर्फ बाहिरी रौशनी
मुस्कुरा के कभी कोई दिल रोशन करो
निकलो शहर की चकाचौंध से दूर
कभी जगमाते जुगनुओ का पीछा करो
पाया है बहुत कुछ जिंदगी में तुमने
अब चलो ख़ुद को हासिल करो
आज न मिले ठिकाना न सही
कभी इस राह को ही मंजिल करो
प्यारी है अपनी खुशी सबको
कभी औरो की हँसी की चाहत करो
दोस्तों के लिए है जान भी हाजिर
कभी दुश्मन से भी मोहब्बत करो
Saturday, January 3, 2009
Mahasatta : Glory unto Lord
To him who creates , nurtures and destroys!
अकथनीय , अवर्णित, परमसत्ता , प्रतिपल करे जग को विस्मित
अद्रिशय होकर भी रहती है, जल थल नभ में निरंतर विचलित
निर्गुण, निरंकार ,निरिविकर , पर करती अनंत स्वरुप विक्सित
है परम्पुन्ज सत् चित् आनंद, ध्यान मात्र कर दे आह्लादित
तुम सरंक्ष्हक , तुम संचालक, हे जगन्नाथ, जगतपति, जगदीश
हे पालनहार तुम ही धरा पर जीव स्वरुप और तुम ही जीवों के ईश
हे जीवनदाता विश्व विधाता, मनुज मात्र का उद्भव तुम्हारा चिर आशीष
अभेद्य, अकल्पनीय, सत्ता के अधिपति , झुके इन चरणों में हमारे शीश
ओ अनादी, अनंत, अद्भुत, तुम हो प्रारंभ तुम्ही हो अंत
पूर्णता , दिव्यता, स्वाभाव तुम्हारा, तुम अजर, अमर अक्षुन्य अखंड
सूर्य को प्रकाशित करने वाले प्रकाशपुंज, ध्यान मात्र हरे तिमिर तुंरत
तुम ही हो शास्वत अविनाशी, सृष्टि के सृजन से लेकर सृष्टि पर्यंत
Monday, December 8, 2008
रंग ऐ शहादत - Colour of Martyrdom
In 60 hours total 14 officers from police, ATS & NSG gave their lives to save innocent people . Will it be enough to only pay tribute to these heroes .... This may be the first of our duty toward these bravehearts but definetly not the last.
बड़ा खूब है ये रंग - ऐ - शहादत
लाल हरा नीला पीला

सब रंग इसके सामने फीके है
इसकी चटक है सुर्ख गुलाब
सादगी सफ़ेद कमल सरीके है
दोस्त ही नही करे दुश्मन भी सलाम
इसे देख हो आरजू - ऐ- इबादत
बड़ा खूब है ये रंग - ऐ - शहादत
नही मिलता ये सारे बाजार
सिर्फ़ नसीबो वाले ही इसे पाते है
नही खेल है ये बच्चों का
इससे खेलने वाले जान पे खेल जाते है
सोना चाँदी हीरे मोती का कुछ मोल नही
शहीद चुकाते है खून से इसकी कीमत
बड़ा खूब है ये रंग - ऐ - शहादत
इस रंग का चोला पहनकर
सरफिरे वतन पर जान गंवाते है
रखने को तिरंगा उंचा हमेशा
हँसते हँसते सर कटवाते है
सिखाया इसने जीना बनकर शान - ऐ - वतन
और मरते दम तक करना हिफाजत
बड़ा खूब है ये रंग - ऐ - शहादत
कभी ये भिगोये माँ का आँचल
कभी बहन की आँख भिगोता है
फिर हो कच्चे धागे या जंजीर कोई
ये सबको दुःख की सुई में पिरोता है
इसे नही परवाह रिश्तो नातों की
सिर्फ़ वतन से हो रश्म - ऐ - मोहब्बत
बड़ा खूब है ये रंग - ऐ - शहादत
चढ़ जाए जिसपे ये रंग
वो मर कर भी अमर हो जाता है
भले ही हो लाखों इन्द्रधनुष यहाँ
ये है पक्का रंग , अलग छाप छोड़ जाता है
इसकी खुशबु रहे हवा में हमेशा
चाहे हो अघाज़-ऐ-जहाँ या मंजर-ऐ-क़यामत
बड़ा खूब है ये रंग - ऐ - शहादत
Friday, December 5, 2008
Humse ye jahan hai : The youth of today
हमसे है ताक़त , हमसे है हिम्मत हमसे ये जहाँ है
दोस्तों हमारे जैसा दुनिया में कोई कहाँ है
जिस जगह हम रुके एक नयी मंजिल बन जाती है
कोई नही है साथ फिर भी सारी दुनिया साथी है
नही इंतज़ार किसी कारवां का हम अकेले बअढ़ते जायेंगे
बदल डालेंगे नक्शे , हर सफर में एक नयी राह बनायेंगे
जो हो हिम्मत तो फिर होगा रब भी साथ किसी ने कहा है
हमसे है ताक़त , हमसे है हिम्मत हमसे ये जहाँ है
बंजर धरती में हम फिर से फूल खिला सकते है
आज जहा है मरुभूमि वहा पर भागीरथी बहा सकते है
जो जिद पे आ जाए तो धरती को आकाश में मिला देंगे
असफलता नही है स्वीकार , हर नामुमकिन को आसान बना देंगे
चुनौतियों को भी हमने दी चुनौती , विजय को जीत लिया है
हमसे है ताक़त , हमसे है हिम्मत हमसे ये जहाँ है
मानवता है धरम हमारा , परसेवा है कर्म हमारा
रहे प्यार और विश्वास इंसान में , ये सदा है प्रण हमारा
जाती पांति और उंच नीच की विषमताओं से हम परे है
सद्भाव और भाईचारे के ध्वज साथ लेकर चले है
एकता और समता का मंत्र हमे स्वयं युगपुरुषों ने दिया है
हमसे है ताक़त , हमसे है हिम्मत हमसे ये जहाँ है
Friday, August 29, 2008
Sawaal vadiyo se : Questions for valley
Suna hai Vadiyo me phir tanav hai kya
Kuchh pata to karo chunav hai kya
Kyun Loktantra lachar hai yaha par
Kyun janshakti karti guhaar hai yaha par
Siyasi takton me Mann mutav hai kya
Suna hai Vadiyo me phir tanav hai kya
Gunjte hai naare mere deskh ke khilaf yaha
logon ne pehna hai algaavbaad ka lihaf yaha
Kisi aur sarjami ki taraf jhhukav hai kya
Suna hai Vadiyo me phir tanav hai kya
Hua karti thi ye jannat ke samaan kabhi
Jaan padtaa hai dojakh se rujhhan abhi
ye asar kisi buri najar ka prabhav hai kya
Suna hai Vadiyo me phir tanav hai kya
Ab to panchhiyo ka bhi nahi basera yaha
Kya hoga phir kabhi ek naya sabera yaha
ya phir ye kaalratri ka vaadi se lagaav hai kya
Suna hai Vadiyo me phir tanav hai kya
Is jamin pe ab farishto ka abhaav hai kya
Monday, August 25, 2008
Tumhara Sath : The power of togetherness
Agar tum sath do to..
Bin pankho ke ud sakta hoo mai
Badlo par bhi chal sakta hoo mai
Jindagi ki raftar hogi itni tej
Ek lamhe me saidyan ji sakta hoo mai.
Agar tum sath do to..
Har taraf roshni, na kahi andhkar rahe
Sabhi sapney mere Sakar rahe
Jarurat nahi mujhe suraj aur chand ki
Teri aabha me dooba ye sansar rahe
Agar tum sath do to..
Safar se pehle hi mil jaaye manjil
Dariya ka har katra ho mera sahil
Rah ho bhale hi kitni hi lambi
Kafilo ke chahat na kare ye dil
Agar tum sath do to..
Tuesday, August 19, 2008
Aakhiri Baat : The message of departure
It represents my feeling for all friends.
Aaj milna kal bicchadana jeevan ka dastoor hai
Dil to nahi manta lekin hum majboor hai
Humaare door jaane se dosti na hogi kum
Apna ek naya jaha basaane ko aaj nikal diye hum
Sath jo aakpa tha , bada suhana tha ye safar
Aap ne aasan banaya , har manjil har dagar
Aapne milaya humaare har kadam se kadam
Kis tarah kare ab aakpa shukriya ada hum
Jaane se pehle sirf itnaa hum kahte jaayenge
Kasam hai apne sath ko hum kabhi na bhulayenge
Jab bhi doge aawaj , kareeb najar aayenge hum
Ye dosti rahegi aabaad jab tak hai seene dum
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