Thursday, April 7, 2011
Ab chup rahe to...
आज की रुक रही है साँसे,
क्या सिर्फ मूक बने देखते जाओगे।
जो नहीं किया सामना इस पल का,
आने वाले पल को क्या समाझाओगे ।
एक चिंगारी कब तक जले अँधेरे में,
कब तुम अपना खून जलोअगे ।
अब चुप रहे तो... जीवन भर फिर पछताओगे
जो देखे सपने सुन्दर कल के,
सोते रहने से नहीं होंगे पूरे ।
चलो जागो अब नया दम भरो,
फिर शुरू करे वो काम अधूरे ।
उठो देखो नए सूरज का मंजर,
क्या अब भी सोते रह जाओगे ।
अब चुप रहे तो... अंधेरो का ही साथ पाओगे॥
जो लड़े दुनिया से तुम्हारे लिए,
तुम उस मसीहा के इंतज़ार में जिए ।
यु ही नहीं मिलती आसमानी मदद,
बिना कोई बलिदान दिए ।
जगा लो ऐसा विश्वास दिल में ,
अपनों में से ही नया मसीहा बनोगे।
अब चुप रहे तो... सब खो कर भी कुछ न फिर पाओगे
आने वाली नस्ल तुमसे जवाब मांगेगी,
क्यूँ न रोकी ये आंधी हिसाब मांगेगी।
दीवार बन जाओ मजबूत इरादों की ,
तूफानी हवा भी दामन में पनाह मांगेगी।
जब क़यामत की लहर उठेगी हर तरफ,
न फिर बंद दरवाजो में छुप पाओगे।
अब चुप रहे तो॥ कैसे खुद से नजरे मिलोगे
Dedicated to the spirit of Anna Hazare
Wednesday, November 17, 2010
khud apna khuda banunga
पाना है मुश्किल undekhe unjaane को
वैसा नहीं कोई मिला जैसी मूरत है
नहीं पता है कैसी वो सूरत है
अपना सा ही चेहरा तुझे लगाऊंगा
अब खुद अपना खुदा बनाऊंगा
गुमो को तुने देखा पथराई आँखों से
न jhhuma तू खुशियों के बाजों पे
जो साथ मेरे हँसे और साथ रोये
तेरे दिल में सारे अहसास जगाऊंगा
अब खुद अपना खुदा बनाऊंगा
किसी ने कहा है आसमान में तेरा बसेरा
कोई कहता तुने डाला है मंदिर में डेरा
क्यों रहे तू मुझसे इतनी दूर भला
तुझे अपने पड़ोस में ही कही बसाऊंगा
अब खुद अपना खुदा बनाऊंगा
समझना अभी है तुम्हे कितना मुश्किल
राज छुपाये वेद , श्लोक और मंत्र जटिल
न जरुरत हो पूजा पाठ और तप की
सिर्फ नाम बुलाने से ही पा जाऊंगा
अब खुद अपना खुदा बनाऊंगा
Tuesday, August 3, 2010
Fir Muskura Do Naa
फिर मुस्कुरा दो ना
जयो चाँद घट के बढ़ जाए
रेत पे सफ़ेद चादर बिछाए
बसंत जब छू ले बाग़ को
किसी कोने में कोयल कूक जाए
हंसी की खनक सुना दो ना
फिर मुस्कुरा दो ना
ताजगी बारिश की फुहारों सी
चमक टिमटिमाते तारो सी
गूंजे ये हंसी कुछ ऐसे
रौनक हो यादो के गलियारों की
बुझे से इस मन को बहला दो ना
फिर मुस्कुरा दो ना
ये ऐसा दिया जो और दिए जलाए
पल भर में बिगड़ी बात बनाए
हटा दे ग़मो का मनहूस साया
ख़ुशी की सुनहरी धुप फैलाये
आँखों की नमी को मिटा दो ना
फिर मुस्कुरा दो ना
Monday, April 12, 2010
srujan
कर मन कुछ नया सृजन
पुराने सारे खंडहर तोड़ दे
जो न बदले वो वक़्त छोड़ दे
नए सुर , नए ताल , बना कोई नयी धुन
कर मन कुछ नया सृजन
चल खोज सम्भावना परिवर्तन की
सपनो की ईमारत को मिले नीव चिंतन की
कल्पना के घोड़े रचना के गगन पे उड़े
आज इन्द्रधनुष में भी कोई नया रंग भरे
अब न हो कोई सीमा कोई बंधन
कर मनं कुछ नया सृजन
नीले फलक पे भी तेरी अपनी छाप रहे
कृति ऐसी जो तेरे भी बाद रहे
चेतना जब रच दे एक नया जीवन
बन सकता है तू मानव से भगवन
नयी बसंत, नव तरु प्रफुल्लित नव सुमन
कर मनं कुछ नया सृजन
Tuesday, March 23, 2010
You !
Be it this life or some other each will belong to your shadow
still these words aren't enough to say what I want to tell you
Like earth moves around sun , my life revolves around you
feeling your presence always , I miss you so much I really do
It will take many attempts to explain how I feel about you
I can feel you so close , even when I am away from you
It is warmth of your smile, or it is the way your eyes glow
Need to tell you many things, where to start I don't know
Wednesday, February 24, 2010
Meri Saanse
किये न जाने कितने टुकड़े
न जाने कितने हिस्से
तेज धार से काट दी मेरी साँसे
मजहब ने कहा खुदा की नेमत है
तू है जिन्दा ये उसकी रहमत है
कर दो जहां के मालिक का शुकर
रखता है वो तेरी हर सांस की खबर
है जमीन और आसमान की ये साँसे
जिंदगी ने यु बाँट दी मेरी साँसे
मुल्क जिसने बनाई तेरी पहचान
चुकाना है उसका भी अहसान
गवा दे कुछ साँसे वतन परस्ती में
होगा तेरा नाम शहीदों की बस्ती में
सरहदों ने फिर काट दी ये साँसे
जिंदगी ने यु बाँट दी मेरी साँसे
समाज और इन्सानियत भी मांगते हिसाब
तुझे सलामत रखे है हमारा लिहाफ
कौम का है जो कर्ज तुझ पर
उसे हर सांस की कीमत पे अदा कर
अब तो लगती है उधार की साँसे
जिंदगी ने यु बाँट दी मेरी साँसे
Wednesday, January 27, 2010
chand ki khwaish
मेरे लिए वो खुद रात भर जलता रहा
है ये छोटा सा घर मेरा न कोई महल
इसमें आसमानी टुकडो की नुमाइश क्यों करता
मै चाँद की ख्वाइश भला क्यूँ करता
एक जुगनू बैठ खिड़की पर मुस्कुराती रही
छोड़ अपना घर मेरे लिए जगमगाती रही
चाँद तो रोशन है किसी और के दम पर
मै उधार की रौशनी की गुजारिश क्या करता
मै चाँद की ख्वाइश भला क्यूँ करता
जिंदगी में उजाला भरती रही तेरी नजर
इन आँखों की चमक रहे साथ उम्र भर
जो है भटका पूनम और अमावस के बीच
उसे राहगुजर बनाने की सिफारिश क्यों करता
मै चाँद की ख्वाइश भला क्यूँ करता
