Visit blogadda.com to discover Indian blogs sa(u)ransh: A part of Me !: February 2010

Wednesday, February 24, 2010

Meri Saanse

जिंदगी ने यु बाँट दी मेरी साँसे
किये न जाने कितने टुकड़े
न जाने कितने हिस्से
तेज धार से काट दी मेरी साँसे

मजहब ने कहा खुदा की नेमत है
तू है जिन्दा ये उसकी रहमत है
कर दो जहां के मालिक का शुकर
रखता है वो तेरी हर सांस की खबर
है जमीन और आसमान की ये साँसे
जिंदगी ने यु बाँट दी मेरी साँसे

मुल्क जिसने बनाई तेरी पहचान
चुकाना है उसका भी अहसान
गवा दे कुछ साँसे वतन परस्ती में
होगा तेरा नाम शहीदों की बस्ती में
सरहदों ने फिर काट दी ये साँसे
जिंदगी ने यु बाँट दी मेरी साँसे

समाज और इन्सानियत भी मांगते हिसाब
तुझे सलामत रखे है हमारा लिहाफ
कौम का है जो कर्ज तुझ पर
उसे हर सांस की कीमत पे अदा कर
अब तो लगती है उधार की साँसे
जिंदगी ने यु बाँट दी मेरी साँसे