कर मन कुछ नया सृजन
पुराने सारे खंडहर तोड़ दे
जो न बदले वो वक़्त छोड़ दे
नए सुर , नए ताल , बना कोई नयी धुन
कर मन कुछ नया सृजन
चल खोज सम्भावना परिवर्तन की
सपनो की ईमारत को मिले नीव चिंतन की
कल्पना के घोड़े रचना के गगन पे उड़े
आज इन्द्रधनुष में भी कोई नया रंग भरे
अब न हो कोई सीमा कोई बंधन
कर मनं कुछ नया सृजन
नीले फलक पे भी तेरी अपनी छाप रहे
कृति ऐसी जो तेरे भी बाद रहे
चेतना जब रच दे एक नया जीवन
बन सकता है तू मानव से भगवन
नयी बसंत, नव तरु प्रफुल्लित नव सुमन
कर मनं कुछ नया सृजन
